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अचार की डिबिया — Free royalty-free pop music for YouTube, streaming, podcasts. Duration 3:38. No attribution required.
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Lyrics
[Chorus]
सूरज शहद सा फैला है हाथों में,
धूल उड़ी है रेशमी साड़ियों से।
ये दोपहर है सुकून की, मेरी जान,
माँ की अचार की डिबिया, अब भी गरम है मेरी जान।
[Verse]
छत पर बैठी, फैलाए खस,
बिल्ली सोई, पैरों के पास।
माँ ने झोला में डाला था,
याद आया, कॉल के बाद।
[Pre-Chorus]
मिट्टी और घास की खुशबू आई,
चेहरे पर मुस्कान छाई।
ये पल ठहरा सा लगता है,
जैसे कानों में रुई भर आई।
[Chorus]
सूरज शहद सा फैला है हाथों में,
धूल उड़ी है रेशमी साड़ियों से।
ये दोपहर है सुकून की, मेरी जान,
माँ की अचार की डिबिया, अब भी गरम है मेरी जान।
[Verse]
बाँस की खपरेलें, फीकी सी साड़ी,
एक बजे का पहर, ये दुनिया सारी।
धूप की चादर ओढ़े मैं,
खोई यादों की क्यारी।
[Pre-Chorus]
माँ की बातें, वो प्यार भरा,
गुजर गया जो, वो कल खरा।
हाथों में वो डिबिया प्यारी,
जैसे उन्होंने दिया सहारा।
[Chorus]
सूरज शहद सा फैला है हाथों में,
धूल उड़ी है रेशमी साड़ियों से।
ये दोपहर है सुकून की, मेरी जान,
माँ की अचार की डिबिया, अब भी गरम है मेरी जान।
[Bridge]
वो हँसी, वो बातें, वो सब पल,
जैसे लिपटे कानों को हर पल।
ये सुकून है, ये प्यार है,
माँ की ममता का आँचल।
[Verse]
बिल्ली ने ली अंगड़ाई,
सूरज की किरणें हैं छाई।
एक नई उम्मीद जगी है,
जैसे आई हो परछाई।
[Chorus]
सूरज शहद सा फैला है हाथों में,
धूल उड़ी है रेशमी साड़ियों से।
ये दोपहर है सुकून की, मेरी जान,
माँ की अचार की डिबिया, अब भी गरम है मेरी जान।
Track Details
| Genre | pop |
| Mood | healing |
| Scene | — |
| Primary Instrument | female |
| Voice Type | female |
| Duration | 3:38 |
| File Size | 6MB |
| Language | 🇮🇳 हिन्दी |
| Lyrics | ✓ Available |
| Created | 2026-05-15 |