धरती की खुशबू में बसी यादें
Folk

धरती की खुशबू में बसी यादें

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About this track

धरती की खुशबू में बसी यादें — No copyright music, folk music royalty free. Copyright free music for YouTube, streaming, podcasts, and video creation. Duration 3:46. No attribution required.

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Vocal ensemble, mixed choir, full and warm, immediate vocal entrance, no instrumental preamble, starts with lyrics, folk music style, homesick mood, acoustic guitar, fingerpicking, intimate and raw, emotional storytelling, professional studio production, clear vocals, high quality mastering, Hindi Folk, Ballad, Emotional, Acoustic Pop, Cinematic

Lyrics

[Intro] [Chorus] धरती की सोंधी खुशबू, साँसों में समाई है गाँव की वो कच्ची राहें, यादों में उतर आई हैं सपनों की खातिर घर छोड़ा, मन में उलझनें लाई हैं मंज़िल की तलाश में, आँखें भर आई हैं हाँ, आँखें भर आई हैं [Verse] सुनहरी धान की चादर, ओढ़े खड़ा है खेत मेरा भोर का हल्का कोहरा, यादों का घेरा बनाए कंधे पर रखा है झोला, मन का बोझ लिए चलूँ शहर की ओर चल पड़ा, वादों के साथ उलझूँ पाँव आगे बढ़ते हैं, रूह पीछे रह जाए भीगी मिट्टी की महक, मुझसे कुछ कह जाए [Pre-Chorus] माँ खड़ी है चौखट पर, आँचल अपना लहराए बाबूजी की खामोश आँखें, सब कुछ कह जाएं दुख है बिछड़ने का मगर, एक आस की डोर पकड़ी है मेरे कल के लिए ही, आज का सूरज जलता है [Chorus] धरती की सोंधी खुशबू, साँसों में समाई है गाँव की वो कच्ची राहें, यादों में उतर आई हैं सपनों की खातिर घर छोड़ा, मन में उलझनें लाई हैं मंज़िल की तलाश में, आँखें भर आई हैं हाँ, आँखें भर आई हैं [Verse] मंदिर की वो दूर घंटी, कानों में गूंजती रहती पुरानी गलियाँ बचपन की, मन को छूती रहती धुंधला होता जाता, अब मेरे घर का साया क्या खोया है मैंने आज, और क्या पाया है बाज़ी में? खेतों की हरियाली अब, धीमे से ओझल होती शहर की भीड़ में, पहचान अपनी खोती [Bridge] ये रास्ते अनजान हैं, ये मंज़िलें बेनाम हैं पर अपनों की खुशहाली, मेरा अंतिम मकसद है मुड़कर देखूँ तो पैर थम जाएं, मन में लौट आएं पर आने वाले दिन मुझे, आगे बुलाते हैं यही तो जीवन की रीत है, यही तो सबकी कहानी है आँखों में सपनों का चमक, थोड़ा पानी भी है [Chorus] धरती की सोंधी खुशबू, साँसों में समाई है गाँव की वो कच्ची राहें, यादों में उतर आई हैं सपनों की खातिर घर छोड़ा, मन में उलझनें लाई हैं मंज़िल की तलाश में, आँखें भर आई हैं हाँ, आँखें भर आई हैं [Post-Chorus] घर की यादें शहर की राहें सब समेटे खुली ये बाहें [Outro]

Track Details

Genrefolk
Moodhomesick
Scene
Primary Instrumentmixed
Voice Typemixed
Duration3:46
File Size6MB
Language🇮🇳 हिन्दी
Lyrics✓ Available
Created2026-08-17

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