नारंगी बिल्ली
Bollywood

नारंगी बिल्ली

⏱ 3:12
▶  Play Now ← Back to Browse
सुकून भरी धुन
📀 Album

सुकून भरी धुन

About this track

नारंगी बिल्ली — Free royalty-free bollywood music for YouTube, streaming, podcasts. Duration 3:12. No attribution required.

AI Generation Prompt

Male vocalist, powerful and intimate, storyteller, opens immediately with vocals, zero-second intro, first note is the voice, bollywood music style, healing mood, orchestral, rich production, dramatic and emotional, warm production, gentle dynamics, comforting sound, emotional storytelling, professional studio production, clear vocals, high quality mastering, Bollywood, Indian Pop, Ballad, Melancholic, Nostalgic, Cozy, Winter, Delhi

Lyrics

[Chorus] धूप खिली है बालकनी में, दिल्ली की दोपहर में पैरों तले गरम सीमेंट, बिल्ली भी सोई है ये कैसी बेफिक्री, जैसे बरसों की यादें ज़िंदगी ठहरी सी लगे, इस ठंडी धूप में [Verse] स्कूल की छुट्टी हुई, कंधे पे बस्ता भारी पर दिल में सुकून है, जैसे माँ की लोरी रजाई सी नर्म धूप, गालों को छूती है पुराना रेडियो बजता, मीठी धुन सुनाती [Pre-Chorus] झुमका मेरा ज़रा, हवा में लहराए जैसे कोई बच्चा, धीरे से मुस्काए दीवारों पे छनती धूप, सुनहरी रेत सी उड़े होंठों पे भी वो धुन, गुनगुनाए [Chorus] धूप खिली है बालकनी में, दिल्ली की दोपहर में पैरों तले गरम सीमेंट, बिल्ली भी सोई है ये कैसी बेफिक्री, जैसे बरसों की यादें ज़िंदगी ठहरी सी लगे, इस ठंडी धूप में [Verse] वो नारंगी बिल्ली, आँखें आधी मींचे सूरज की किरणों में, जैसे सपने खींचे कोने में रखा रेडियो, साठ के दशक की धुन मैं भी गुनगुनाती, भूल के सारे गम [Pre-Chorus] उंगलियाँ मेरी जैसे, बुनती हैं कोई जाल धूप के धागों से, करती हैं कमाल हर कण हवा का, जैसे एक गीत गाए अकेलेपन को धीरे, सहलाए [Chorus] धूप खिली है बालकनी में, दिल्ली की दोपहर में पैरों तले गरम सीमेंट, बिल्ली भी सोई है ये कैसी बेफिक्री, जैसे बरसों की यादें ज़िंदगी ठहरी सी लगे, इस ठंडी धूप में [Bridge] जैसे माँ आटा गूँथे, प्यार से थपकी दे वैसे ही धूप ये, दिल को सहलाए नन्हें पैर ज़मीन पे, थिरकें धीरे-धीरे ये पल थम जाए यहीं, काश ये कभी ना ढले [Verse] दीवारों पे छनती धूप, सुनहरी रेत सी उड़े होंठों पे भी वो धुन, गुनगुनाए जैसे कोई कारीगर, जज़्बात पिरोए मैं भी इस पल में, खुद को ही पाऊँ [Chorus] धूप खिली है बालकनी में, दिल्ली की दोपहर में पैरों तले गरम सीमेंट, बिल्ली भी सोई है ये कैसी बेफिक्री, जैसे बरसों की यादें ज़िंदगी ठहरी सी लगे, इस ठंडी धूप में [Outro]

Track Details

Genrebollywood
Moodhealing
Scene
Primary Instrumentmale
Voice Typemale
Duration3:12
File Size5MB
Language🇮🇳 हिन्दी
Lyrics✓ Available
Created2026-05-22