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दोपहर की छाँव — Free royalty-free folk music for YouTube, streaming, podcasts. Duration 2:27. No attribution required.
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Lyrics
[Verse]
धूप छनती बरगद के पत्तों से, हाथों पर निशान,
पीतल की केतली से आती, मीठी सी आवाज़,
ये मुंबई की दोपहर, यादों का है जहाँ,
कथक की थिरकन थमी, अब सुकून की है प्यास।
[Verse]
ट्रेनें गुज़रती हैं दूर, शोर है थोड़ा कम,
लकड़ी की बेंच पे बिल्ली, पूँछ से घेरे पैर,
उसकी रेशमी खाल सहलाऊँ, मन को मिले आराम,
चाय की गरमी है हाथों में, भूलूँ सारे ग़म।
[Pre-Chorus]
पलकें झपकाऊँ तो लगे, सूरज इंद्रधनुष सा,
हर किरण में रंग भर जाए, जैसे कोई ख़्वाब,
ये पल यहीं ठहर जाए, ना बीते ये समाँ,
इस सुकून में खो जाऊँ, पा लूँ अपना आप।
[Chorus]
धूप छनती बरगद के पत्तों से, हाथों पर निशान,
पीतल की केतली से आती, मीठी सी आवाज़,
ये मुंबई की दोपहर, यादों का है जहाँ,
कथक की थिरकन थमी, अब सुकून की है प्यास।
[Verse]
कानों में गूँजे वो धुन, जो सिखाई थी कभी,
दादी माँ की लोरी जैसी, मीठी सी वो पुकार,
उनके आग़ोश में छिपना, जैसे कंबल की गर्माहट,
वो महक, वो प्यार भरा स्पर्श, आज भी है बरकरार।
[Bridge]
ज़िंदगी की ये राहें, कभी सीधी, कभी टेढ़ी,
हर मोड़ पे कोई कहानी, हर लम्हा एक राज़,
नाचना है, जीना है, हर पल को है सहेजना,
इस दोपहर की छाँव में, बीते सारे काज़।
[Chorus]
धूप छनती बरगद के पत्तों से, हाथों पर निशान,
पीतल की केतली से आती, मीठी सी आवाज़,
ये मुंबई की दोपहर, यादों का है जहाँ,
कथक की थिरकन थमी, अब सुकून की है प्यास।
[Outro]
Track Details
| Genre | folk |
| Mood | healing |
| Scene | — |
| Primary Instrument | mixed |
| Voice Type | mixed |
| Duration | 2:27 |
| File Size | 4MB |
| Language | 🇮🇳 हिन्दी |
| Lyrics | ✓ Available |
| Created | 2026-06-02 |