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जड़ी की राह — Free royalty-free folk music for YouTube, streaming, podcasts. Duration 3:36. No attribution required.
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Lyrics
[Chorus]
धुंध में लिपटी सुबह, कंपकंपाती हवा,
मुस्कान की जड़ी, मेरे हाथों में थमी।
पहाड़ों की बातें चलती हैं, ये कहानी पुरानी,
एक लकीर खींची है, तेरी राहों पे अभी।
[Verse]
पतझड़ की इस बेला में, जब सूरज ना जागे,
मैं जड़ी-बूटियाँ चुनता, मेरे संग ये धुंध भागे।
ये जड़ी है खास, मेरे पुरखों की निशानी,
इसे मैं सौंपता हूँ, तुझे ऐ राहगीर, ले जानी।
[Pre-Chorus]
ठंडी हवा सरसराए, ओट में है ये घाटी,
तूफानों से लड़ने वाली, ये जड़ी मेरी छाती।
[Chorus]
धुंध में लिपटी सुबह, कंपकंपाती हवा,
मुस्कान की जड़ी, मेरे हाथों में थमी।
पहाड़ों की बातें चलती हैं, ये कहानी पुरानी,
एक लकीर खींची है, तेरी राहों पे अभी।
[Bridge]
पत्थर की भट्टी से उठता, धुएँ का वो घेरा,
चौखट पे खींचे ऐसी, ज्यों कोई हो डेरा।
मन मेरा लीन हुआ, ध्यानाकर्षण की माया,
पैर तले बहती धारा, बादाम के खेत की छाया।
[Verse]
कंकड़ पीसता हूँ, जड़ें कूटता हूँ धीरे,
रंग उड़ते हैं हवा में, जैसे पंछी हों फिरे।
ये सुकून है मेरा, ये मेरा ध्यान है गहरा,
सब मोह माया लगती, इस दुनिया का बसेरा।
[Chorus]
धुंध में लिपटी सुबह, कंपकंपाती हवा,
मुस्कान की जड़ी, मेरे हाथों में थमी।
पहाड़ों की बातें चलती हैं, ये कहानी पुरानी,
एक लकीर खींची है, तेरी राहों पे अभी।
[Outro]
पिघलती वो चोटियाँ, गिरतीं तांबे के प्याले,
एक मीठी सी गूँज, जैसे सपने हों संभाले।
Track Details
| Genre | folk |
| Mood | tranquil |
| Scene | — |
| Primary Instrument | male |
| Voice Type | male |
| Duration | 3:36 |
| File Size | 6MB |
| Language | 🇮🇳 हिन्दी |
| Lyrics | ✓ Available |
| Created | 2026-05-25 |