पुरानी कोठी का आँगन
Folk

पुरानी कोठी का आँगन

⏱ 3:38
▶  Play Now ← Back to Browse
यादों का संग
📀 Album

यादों का संग

About this track

पुरानी कोठी का आँगन — Free royalty-free folk music for YouTube, streaming, podcasts. Duration 3:38. No attribution required.

AI Generation Prompt

Layered vocals, male/female call-and-response, rich vocal stack, opens immediately with vocals, zero-second intro, first note is the voice, folk music style, nostalgic mood, acoustic guitar, fingerpicking, intimate and raw, retro touches, bittersweet tone, memory-evoking, emotional storytelling, professional studio production, clear vocals, high quality mastering, Indian Folk, Ballad, Nostalgic, Uttar Pradesh, Childhood Friendship

Lyrics

[Chorus] आम की खट्टी-मीठी डली, होंठों पे है आज भी बरगद की छाँव में, वो दोपहरें याद हैं नीम की कड़वी धूप में, तेरी-मेरी बात थी वो पुरानी कोठी का आँगन, दिल में आबाद है [Verse] धूल उड़ी, हवा चली, दरवाज़े पे मैं खड़ा सावन की पहली फुहार, गीली मिट्टी की महक सामने आँगन के वो नीम, जड़ों में छुपा वो डब्बा यादों की चाबी कहीं, दिल में ही अटक गई [Pre-Chorus] माँ की रसोई से आती, चपाती की खुशबू लकड़ी का झूला वो, धीमी सी आवाज़ करे हर लम्हा जैसे ठहरा, उस पल में ही खोया वो बचपन का जहाँ, अब भी मुझे पुकारे [Chorus] आम की खट्टी-मीठी डली, होंठों पे है आज भी बरगद की छाँव में, वो दोपहरें याद हैं नीम की कड़वी धूप में, तेरी-मेरी बात थी वो पुरानी कोठी का आँगन, दिल में आबाद है [Verse] जंग लगी चाबी, वो गुल्लक में पड़ी थी पुरानी फिल्म की टिकट, रंग उसका फीका था गिनते थे चींटियों की कतार, ईंटों के बीच में तेरी-मेरी दोस्ती का, वो पहला अहसास था [Pre-Chorus] माँ की रसोई से आती, चपाती की खुशबू लकड़ी का झूला वो, धीमी सी आवाज़ करे हर लम्हा जैसे ठहरा, उस पल में ही खोया वो बचपन का जहाँ, अब भी मुझे पुकारे [Chorus] आम की खट्टी-मीठी डली, होंठों पे है आज भी बरगद की छाँव में, वो दोपहरें याद हैं नीम की कड़वी धूप में, तेरी-मेरी बात थी वो पुरानी कोठी का आँगन, दिल में आबाद है [Bridge] वो नीम का पेड़ गहरा, जहाँ हम बैठते थे बिखरे हुए थे लम्हे, जैसे कागज के टुकड़े हर बात तेरी, हर हँसी, आज भी गूँजती है खोए हुए रास्तों पे, तेरी याद मुझे खींचे [Verse] वो बरगद की छाँव अभी भी वैसी है धूप अभी भी तीखी है, शाम अभी ढल रही पर तेरे बिना सब सूना, जैसे कोई कहानी जो पूरी हुई नहीं, बस यूँ ही रह गई [Outro]

Track Details

Genrefolk
Moodnostalgic
Scene
Primary Instrumentmixed
Voice Typemixed
Duration3:38
File Size6MB
Language🇮🇳 हिन्दी
Lyrics✓ Available
Created2026-06-01

More like this

1 骤雨欢歌

骤雨欢歌

Other ⏱ 2:32
2 五分钟倒数

五分钟倒数

Other ⏱ 2:44
3 صندل بالٍ

صندل بالٍ

Other ⏱ 2:49
4 花园老猫

花园老猫

Other ⏱ 2:36
5 Homeward Gleam

Homeward Gleam

Other ⏱ 3:29