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खोई हुई धूप — Free royalty-free folk music for YouTube, streaming, podcasts. Duration 3:09. No attribution required.
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Lyrics
[Chorus]
वो पुरानी कुई, सूखी मिट्टी की कूह,
दोपहर की धूप में जलती रही यूँ।
बरसों बीते, मैं लौट आया हूँ,
यादों में डूबा, बस वहीं ठहरा हूँ।
[Verse 1]
गुजरात की गलियाँ, वो कच्ची सी राहें,
मेरे बचपन की बातें आज भी हैं छाई।
मिट्टी की दीवारें, उन पर काई जमी,
मेरे बचपन की दुनिया वहीं पे थमी।
[Pre-Chorus]
गर्मी की वो दोपहर, सूरज आग उगले,
दादाजी की छांव, किस्से अनगिनत बोले।
[Chorus]
वो पुरानी कुई, सूखी मिट्टी की कूह,
दोपहर की धूप में जलती रही यूँ।
बरसों बीते, मैं लौट आया हूँ,
यादों में डूबा, बस वहीं ठहरा हूँ।
[Verse 2]
लोहे का जंग लगा डिब्बा, वो भारी सा,
पानी की ठंडक में था सब कुछ प्यारा सा।
सूखे अंजीरों की कड़वाहट, अब भी याद है,
वक्त की आग ने सब कुछ जलाया है।
[Pre-Chorus]
दादाजी की लोरी, वो पंखा झूलता,
मेरे बचपन के सपने हर पल महकता।
[Chorus]
वो पुरानी कुई, सूखी मिट्टी की कूह,
दोपहर की धूप में जलती रही यूँ।
बरसों बीते, मैं लौट आया हूँ,
यादों में डूबा, बस वहीं ठहरा हूँ।
[Bridge]
दीवारों पे मिटे, वो चॉक के निशान,
लिखी थी उस लड़की का पहला प्यार का नाम।
आज भी फीके हैं, पर दिल में बसे,
वो बीते पल, वो हसीन अक्स।
[Verse 3]
खामोशी से बजती गिटार की तारें,
गहराई में उतरें दिल की पुकारें।
एक आहट सी उठती दिल के अंदर,
वो बचपन की धुन अब भी है बंजर।
[Chorus]
वो पुरानी कुई, सूखी मिट्टी की कूह,
दोपर की धूप में जलती रही यूँ।
बरसों बीते, मैं लौट आया हूँ,
यादों में डूबा, बस वहीं ठहरा हूँ।
Track Details
| Genre | folk |
| Mood | nostalgic |
| Scene | — |
| Primary Instrument | mixed |
| Voice Type | mixed |
| Duration | 3:09 |
| File Size | 5MB |
| Language | 🇮🇳 हिन्दी |
| Lyrics | ✓ Available |
| Created | 2026-06-02 |